ददामि ते वैजयन्तीं मालामम्लानपंकजाम् । धारयिष्यति संग्रामे या त्वां शस्त्रैरविक्षतम्,मैं तुम्हें यह वैजयन्ती माला देता हूँ, जिसमें पिरोये हुए कमल कभी कुम्हलाते नहीं हैं। इसे धारण कर लेनेपर यह माला संग्राममें तुम्हें अस्त्र-शस्त्रोंक आधातसे बचायेगी
वैशम्पायन उवाच