सर्पसत्रे ऋत्विजः सदस्याश्च — Officiants and Assembly at Janamejaya’s Serpent-Sacrifice
कार्य च मम न न्याययं प्रष्ठं त्वां कार्यमीदृशम्। किंतु कार्यगरीयस्त्वात् ततस्त्वाहमचूचुदम्,सुभगे! क्या उन मुनिश्रेष्ठसे तुम्हें गर्भ रह गया है? तुम्हारे साथ उन मनीषी महात्माका विवाह-कर्म निष्फल हो, यह मैं नहीं चाहता। मैं तुम्हारा भाई हूँ, ऐसे कार्य (पुत्रोत्पत्ति)-के विषयमें तुमसे कुछ पूछना मेरे लिये उचित नहीं है, परंतु कार्यके गौरवका विचार करके मैंने तुम्हें इस विषयमें सब बातें बतानेके लिये प्रेरित किया है
kāryaṃ ca mama na nyāyyaṃ pṛṣṭuṃ tvāṃ kāryam īdṛśam | kintu kārya-garīyastvāt tatas tvāham acūcudam, subhage |
Takṣaka said: “It is not proper for me to question you about such a matter. Yet, because the importance of the task is weighty, I have urged you, O fortunate one, to speak about it.”
तक्षक उवाच