ये दन्दशूका: क्षुद्राश्न पापाचारा विषोल्बणा: । तेषां विनाशो भविता न तु ये धर्मचारिण:,जनमेजयके सर्पयज्ञमें उन्हीं सर्पोंका विनाश होगा जो प्राय: लोगोंको डँसते रहते हैं, क्षुद्र स्वभावके हैं और पापाचारी तथा प्रचण्ड विषवाले हैं। किंतु जो धर्मात्मा हैं, उनका नाश नहीं होगा
शेष उवाच