आदि पर्व (अध्याय १२७) — रङ्गे कर्णस्य अवमानः, दुर्योधनस्य प्रतिपक्ष-निवृत्तिः, मैत्री-स्थापनम् / Ādi Parva (Chapter 127) — Karṇa’s Public Humiliation, Duryodhana’s Intervention, and the Formation of Alliance
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ ३ श्लोक मिलाकर कुल ३९३ “लोक हैं) नफमशा+ (3) अमन न षड्विशरत्याधेकशततमो< ध्याय: पाण्डु और माद्रीकी अस्थियोंका दाह-संस्कार तथा भाई- बन्धुओंद्वारा उनके लिये जलांजलिदान धृतराष्ट उवाच पाण्डोर्विंदुर सर्वाणि प्रेतकार्याणि कारय । राजवद् राजसिंहस्य माद्रयाश्रैव विशेषत:,धृतराष्ट्र बोले--विदुर! राजाओंमें श्रेष्ठ पाण्डुके तथा विशेषतः माद्रीके भी समस्त प्रेतकार्य राजोचित ढंगसे कराओ
dhṛtarāṣṭra uvāca | pāṇḍor vidura sarvāṇi pretakāryāṇi kāraya | rājavad rājasimhasya mādryāś caiva viśeṣataḥ ||
Dhṛtarāṣṭra said: “Vidura, have all the funerary rites performed for Pāṇḍu—lion among kings—in a manner befitting royalty; and do so with special care for Mādrī as well.”
धृतराष्ट उवाच