अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
अश्वमेधामृतरसस्त्वाश्रमस्थानसंश्रय: । मौसल: श्रुतिसंक्षेप: शिष्टद्धिजनिषेवित:,अश्वमेधपर्व इसका अमृतमय रस है और आश्रम-वासिकपर्व आश्रय लेकर बैठनेका स्थान। मौसलपर्व श्रुति-रूपा ऊँची-ऊँची शाखाओंका अन्तिम भाग है तथा सदाचार एवं विद्यासे सम्पन्न द्विजाति इसका सेवन करते हैं