भीष्मस्य दुर्योधनं प्रति कुलहितोपदेशः | Bhīṣma’s Counsel to Duryodhana on Dynastic Welfare
मम प्राणेन ये शत्रूज्शक्ता: प्रतिसमासितुम् । मन्यन्ते ते कथं तेषामहं छिन्द्यां मनोरथम्,शत्रुओंसे वैर बाँधकर जो नित्य मेरी उपासना करते हैं तथा जैसे वसुगण इन्द्रको प्रणाम करते हैं, उसी प्रकार जो सदा मुझे मस्तक झुकाते हैं, मेरी ही प्राणशक्तिके भरोसे जो शत्रुओंके सामने डटकर खड़े होनेका साहस करते हैं और इसी आशासे जो मेरा आदर करते हैं, उनके मनोरथको मैं छिन्न-भिन्न कैसे करूँ?
mama prāṇena ye śatrūñ śaktāḥ pratisamāsitum | manyante te kathaṃ teṣām ahaṃ chindyāṃ manoratham ||
Mereka yang mengira bahwa dengan bersandar pada daya hidup dan kekuatanku mereka sanggup bertahan menghadapi musuh—bagaimana mungkin aku mematahkan harapan orang-orang seperti itu?
कर्ण उवाच