स्त्री-विलापः — गान्धार्याः रणभूमिदर्शनं शापवचनं च
Battlefield Lament and Gāndhārī’s Curse
विन्दानुविन्दावावन्त्यौ पतितौ पश्य माधव । हिमान्ते पुप्पितो शालौ मरुता गलिताविव,माधव! जैसे ग्रीष्म-ऋतुमें हवाके वेगसे दो खिले हुए शालवृक्ष गिर गये हों, उसी प्रकार अवन्तीदेशके दोनों वीर राजपुत्र विन्द और अनुविन्द धराशायी हो गये हैं, इनपर दृष्टिपात करो
“Wahai Mādhava, pandanglah—Vinda dan Anuvinda, dua pangeran Avanti, telah rebah gugur. Laksana dua pohon śāla yang sedang berbunga, tumbang dihantam hembusan angin di penghujung musim.”
वैशम्पायन उवाच