कर्म–ज्ञान–दैव–स्वभावविचारः
Inquiry into Karma, Knowledge, Fate, and Nature
वायुदेव उवाच कुकुराधिप यान् मन्ये शृणु तान् मे विवक्षत: । नारदस्य गुणान् साधून् संक्षेपेण नराधिप,श्रीकृष्णने कहा--कुकुरकुलके स्वामी! नरेश्वर! मैं नारदके जिन उत्तम गुणोंको मानता और जानता हूँ, उन्हें संक्षेपसते बताना चाहता हूँ। आप मुझसे उनका श्रवण कीजिये
Keshava (Sri Krishna) berkata: “Wahai penguasa wangsa Kukura, wahai raja manusia, kebajikan Narada yang kuakui dan kuketahui akan kusampaikan secara ringkas; dengarkanlah dariku.”
वायुदेव उवाच