Karṇa-parva Adhyāya 19 — Saṃśaptaka–Trigarta Assault and Aindra-astra Counter
तुल्यतां द्रोणभीष्मा भ्यामात्मनो यो न मृष्यते । वासुदेवार्जुनाभ्यां च न्यूनतां नैच्छतात्मनि,संजयने कहा--राजन्! भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, कर्ण, अर्जुन तथा श्रीकृष्ण आदि जिन वीरोंको आप पूर्ण विद्वान, थनुर्वेदमें श्रेष्ठ तथा महारथी मानते हैं, इन सब महारथियोंको जो अपने पराक्रमके समक्ष तुच्छ समझता था, जो किसी भी नरेशको अपने समान नहीं मानता था, जो द्रोण और भीष्मके साथ अपनी तुलना नहीं सह सकता था और जिसने श्रीकृष्ण तथा अर्जुनसे भी अपनेमें तनिक भी न्यूनता माननेकी इच्छा नहीं की, उसी सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ नृपशिरोमणि पाण्ड्यने अपमानित हुए यमराजके समान कुपित हो कर्णकी सेनाका वध आरम्भ किया
sañjaya uvāca | tulyatāṃ droṇabhīṣmābhyām ātmano yo na mṛṣyate | vāsudevārjunābhyāṃ ca nyūnatāṃ naicchat ātmani ||
Ia tak sudi dianggap sekadar setara dengan Droṇa dan Bhīṣma; dan bila dibandingkan dengan Vāsudeva serta Arjuna, ia tak mau mengakui sedikit pun kekurangan pada dirinya.
संजय उवाच