सो<वतीर्य पुनस्तस्थौ रथे हेमपरिष्कृते,इसके बाद आकाशसे उतरकर वह पुन: अपने सुवर्णमण्डित रथपर स्थित हो गया और मायासे ही पृथ्वी, आकाश एवं सम्पूर्ण दिशाओंमें घूमता हुआ कवचसे सुसज्जित हो कर्णके रथके समीप जाकर विचरने लगा। उस समय उसका मुख कुण्डलोंसे सुशोभित हो रहा था
Lalu ia turun kembali dan berdiri lagi di atas keretanya yang berhias emas.
संजय उवाच