Bhīṣma’s Stuti of Keśava and Counsel on Nara–Nārāyaṇa (भीष्म-स्तवः; नरनारायण-प्रसङ्गः)
संजय कहते हैं--भारत! जब रात बीती और प्रभात हुआ, तब भरतवंशियोंकी सेनाके अग्रभागमें स्थित हुए महामना भीष्म समग्रसेनासे घिरकर शत्रुओंसे युद्ध करनेके लिये चले। उस समय उनके मनमें शत्रुओंके प्रति बड़ा क्रोध था,अपर एकषेष्टितमो< ध्याय: अभिमन्युका पराक्रम और धृष्टद्युम्नद्वारा शलके पुत्रका वध संजय उवाच द्रौणिभूरिश्रवा: शल्यश्रित्रसेनश्व॒ मारिष । पुत्र: सांयमनेश्वैव सौभद्रं पर्यवारयन् संजय कहते हैं--माननीय राजन! द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, भूरिश्रवा, शल्य, चित्रसेन तथा शलके पुत्रने सुभद्राकुमार अभिमन्युको आगे बढ़नेसे रोका
sañjaya uvāca | drōṇibhūriśravāḥ śalyaś citrasenaś ca māriṣa | putraḥ sāyamanes caiva saubhadraṃ paryavārayan ||
Sañjaya berkata: Wahai Maharaja, putra Droṇa, Aśvatthāmā, Bhūriśravā, Śalya, dan Citrasena—bersama putra Sāyamana—mengepung Abhimanyu, putra Subhadrā, dari segala arah dan menahan lajunya.
संजय उवाच