Skanda
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः । दिवीव चक्षुराततम् ॥१४॥
तत् । विष्णोः । परम् । पदम् । सदा । पश्यन्ति । सूरयः । दिवि-इव । चक्षुः । आततम् ॥१४॥
tad viṣṇoḥ paramaṃ padaṃ sadā paśyanti sūrayaḥ | divīva cakṣur ātatam ||14||
विष्णु का वह परम पद ऋषि-सूरि सदा देखते रहते हैं—जैसे आकाश में फैली हुई दृष्टि (नेत्र) निरन्तर प्रकाशित रहती है॥१४॥
That highest station of Viṣṇu the seers always behold—like an eye stretched out in heaven.