Skanda Purana Adhyaya 5
Vishnu KhandaVasudeva MahatmyaAdhyaya 5

Adhyaya 5

स्कन्द पुराण में वसुवंश से जुड़े आदर्श राजा अमावासु का वर्णन है। वह धर्मनिष्ठ, पितृभक्त, संयमी, अहिंसक, विनम्र और स्थिरचित्त है। वह निरन्तर नारायण-मंत्र का जप करता है और पञ्चकाल-क्रम से पूजा करता है—पहले वासुदेव को अर्पण, फिर देवताओं, पितरों, ब्राह्मणों और आश्रितों को प्रसाद-वितरण, और अंत में शेष का स्वयं सेवन; इसे पवित्र-भोजन की नीति बताया गया है। राजा मांसाहार से होने वाली प्राणी-हिंसा को गंभीर दोष मानता है और शासन में असत्य, द्वेष तथा सूक्ष्म अपराधों को भी न्यूनतम रखने का आदर्श रखता है। वह पाञ्चरात्र आचार्यों का सम्मान करता है और काम्य, नैमित्तिक तथा नित्य कर्मों को सात्त्वत/वैष्णव विधि से सम्पन्न करता है। उसकी भक्ति से इन्द्रादि देवों से दिव्य उपहार मिलते हैं, पर कथा सावधान करती है कि देव-समाज में पक्षपात या वाणी-दोष से पतन भी हो सकता है। फिर भी वह पुनः दृढ़ मंत्र-साधना से स्वर्ग-स्थिति प्राप्त करता है, पितृ-शाप से पुनर्जन्म लेकर अंततः ऋषियों में वासुदेव-उपासना बढ़ाता है और वासुदेव के निर्भय परम पद को प्राप्त होता है।

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