हे नृषद् (मनुष्यों में विराजमान), आओ! हे अप्सुषद् (जल में विराजमान), आओ! हे बर्हिषद् (बर्हि पर विराजमान), आओ! हे वनसद् (काष्ठ में विराजमान), आओ! हे स्वर्विद् (स्वर्ग को पाने वाले), आओ!
Root√वह्/√वह्? (न); actually Vedic particle/verb-form: ‘वेट्’ = ‘वेत्/वेट्’ from √विद् ‘जानाति’ in injunctive/imperative sense used as invitatory ‘may he/you come/accept’? (यजुर्वैदिक प्रयोग: ‘वेट्’ = ‘वेतु’/‘आगच्छतु’/‘स्वीकरोतु’)