
Sukta 9.44
Traditionally: Soma Pavamāna hymns are attributed to various seers; specific ascription for RV 9.44 varies by recension/Anukramaṇī (commonly from the Pavamāna collections).
Soma Pavamāna (purifying Soma/Indu)
Likely Jagatī/Triṣṭubh-family meter typical of Pavamāna sections; exact chandas should be verified against the Anukramaṇī for RV 9.44.1.
यह संक्षिप्त पवमान सूक्त सोम का आवाहन करता है कि वह शोधन में प्रवाहित होता हुआ, जीवन की तरंग-सी उछाल लिए, देवों की ओर अग्रसर हो और उनकी उपस्थिति का निमंत्रण दे। मंत्र सोम की परिशुद्ध धारा को ‘सुन्दर यज्ञ’ (अध्वर) से जोड़ते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह पवित्र आसन की स्थापना करे तथा बल, सम्यक् मार्गदर्शन और व्यापक यश प्रदान करे।
Mantra 1
प्र ण इन्दो महे तन ऊर्मिं न बिभ्रदर्षसि । अभि देवाँ अयास्यः ॥
हे इन्दो, हमारे लिए महत् विस्तार के हेतु प्रवाहित हो; मानो एक ऊर्मि (तरंग) धारण किए हुए तू दौड़ता है। देवों की ओर अग्रसर हो—उनका आतुर आह्वाता बनकर।
Mantra 2
मती जुष्टो धिया हितः सोमो हिन्वे परावति । विप्रस्य धारया कविः ॥
मति से प्रिय, धिया द्वारा स्थापित—सोम परावति (दूर-विस्तृत क्षेत्र) में प्रेरित होकर प्रवाहित होता है। धारा के वेग से वह विप्र के कवि-भाव की दृष्टि-धारा को बढ़ाता है।
Mantra 3
अयं देवेषु जागृविः सुत एति पवित्र आ । सोमो याति विचर्षणिः ॥
यह सोम देवों में जाग्रत, सुत होकर पवित्र के पास आता है। विचर्षणि सोम आगे बढ़ता है—विस्तृत-शासन करने वाला, हमारे अनेक कर्म-प्रवृत्तियों को प्रकाश की ओर नियोजित करता हुआ।
Mantra 4
स नः पवस्व वाजयुश्चक्राणश्चारुमध्वरम् । बर्हिष्माँ आ विवासति ॥
वह हमारे लिए पवमान हो—वाजयु (बल-समृद्धि) लाता हुआ; चारु मध्वर (सुंदर अंतःयज्ञ) को रचता हुआ। वह बर्हिष्मान् (यज्ञासन-सज्ज) होकर आसन को तैयार करता है और प्रकाश-शक्तियों को उसमें वास करने हेतु आमंत्रित करता है।
Mantra 5
स नो भगाय वायवे विप्रवीरः सदावृधः । सोमो देवेष्वा यमत् ॥
हमारे लिए सदा-वर्धमान, विप्र-वीर्य से सम्पन्न सोम भगा और वायु की ओर आए; वह देव-शक्तियों में स्वयं को युक्त करे, ताकि सौभाग्य और देवों का प्राण हमारे भीतर प्रवाहित हो।
Mantra 6
स नो अद्य वसुत्तये क्रतुविद्गातुवित्तमः । वाजं जेषि श्रवो बृहत् ॥
वह आज हमारे सच्चे वसुओं के लिए शुद्ध होकर कार्य करे—क्रतु का ज्ञाता, मार्ग का सर्वोत्तम खोजी; वह हमारे लिए वाज (बल-समृद्धि) और विशाल, प्रकाशमय श्रवस् (यश) जीत ले।
The hymn praises Soma Pavamāna—Soma as he is being purified and flowing through the filter (pavitra), moving toward the gods as the sacred offering.
It asks Soma to purify and strengthen the sacrifice, invite the gods to be present, and grant wealth, vigor/victory (vāja), right guidance, and wide fame (bṛhat śravas).
The wave image highlights Soma’s powerful, surging flow during purification and suggests an inner meaning too: clarified energy and consciousness rising and spreading through the being.
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