Rig Veda Sukta 28
Mandala 9Sukta 286 Mantras

Sukta 28

Sukta 9.28

Devata

Soma Pavamāna

यह संक्षिप्त पवमान सूक्त सोम की स्तुति करता है—जब वह मनुष्यों के हाथों और शक्तियों से प्रवर्तित होकर ऊनी पवित्रक (छन्नी) से वेगपूर्वक गुजरता है और देवों के लिए निर्मल, चुनी हुई धारा बन जाता है। सोम को सर्वज्ञ और मन का स्वामी कहा गया है; वह वृषभ-सदृश बल है, जिसे “दस स्वजन शक्तियाँ” आगे बढ़ाती हैं, और वह यज्ञार्पण हेतु तैयार पात्रों को भर देता है। सूक्त का समापन सोम की अजेय, शुद्धि करने वाली धारा में होता है, जो दिव्य वीर्य प्रदान करती है और हानिकारक, मिथ्या वाणी (अघशंस) का विनाश करती है।

Mantras

Mantra 1

एष वाजी हितो नृभिर्विश्वविन्मनसस्पतिः । अव्यो वारं वि धावति ॥

यह सोम वाजी (बल-सम्पन्न) है; नरों द्वारा स्थापित, सर्वविद्, मनस्पति (मन का स्वामी)। यह अवि (ऊन) के वार (छन्ने) में व्यापक होकर दौड़ता है।

Mantra 2

एष पवित्रे अक्षरत्सोमो देवेभ्यः सुतः । विश्वा धामान्याविशन् ॥

यह सोम, देवों के लिए निचोड़ा हुआ, पवित्र छन्ने से होकर बह निकला है; वह समस्त धामों में प्रवेश करता हुआ, सब आसनों और लोक-क्षेत्रों को व्याप्त करता है।

Mantra 3

एष देवः शुभायतेऽधि योनावमर्त्यः । वृत्रहा देववीतमः ॥

यह देव-स्वरूप सोम, अमर्त्य, योनि पर अधिष्ठित होकर दीप्त होता है; वृत्रहन्, देववीतम—देवों को प्राप्त कराने में अति-समर्थ।

Mantra 4

एष वृषा कनिक्रदद्दशभिर्जामिभिर्यतः । अभि द्रोणानि धावति ॥

यह वृषभ-बल, दस जामि-शक्तियों से प्रेरित होकर गर्जता है; वह द्रोणों—पात्रों की ओर दौड़ता है।

Mantra 5

एष सूर्यमरोचयत्पवमानो विचर्षणिः । विश्वा धामानि विश्ववित् ॥

यह पवमान सोम सूर्य को प्रकाशित करता है; वह सर्वदर्शी, व्यापक-गति वाला, विश्ववित्—सब धामों (लोकों/आधारों) को जानने वाला—हमारे समस्त धामों को प्रविष्ट होकर आलोकित करता है।

Mantra 6

एष शुष्म्यदाभ्यः सोमः पुनानो अर्षति । देवावीरघशंसहा ॥

यह सोम—शुष्मी, अदा॑भ्य (अजेय/अपराजित)—पवमान होकर प्रवाहित होता है; वह देवों की वीर-शक्ति लाता है और हमारे भीतर असत्य व पाप की शत्रु-वाणी (अघशंस) का संहार करता है।

Frequently Asked Questions

It praises Soma as he is pressed and purified, flowing through the woolen strainer into vessels for offering, while granting strength, clarity of mind, and protection.

These are key parts of the Soma ritual: the juice is filtered through wool to become clear (pavamāna) and then collected in vessels (droṇa) before being offered to the gods.

It asks Soma to remove harmful, deceitful, or sinful talk—both outward negativity and inner false narratives—so the sacrificer’s speech and mind become truthful and strong.

Ask anything about Sukta 28 of the Rig Veda

Answers come straight from the texts, with the shlokas they draw on. Ask in your own words.

Not sure where to start?

A free Google sign-in keeps your chat saved across web and the app.

Read Rig Veda in the Vedapath app

Scan the QR code to open this directly in the app, with word-by-word meanings, Sanskrit recitation where available, and more.

Continue reading in the Vedapath app

Open in App