
The Great Festival of Damanaka (Spring Damana Blossom Rite)
इस अध्याय में चैत्र मास के दमनक-महोत्सव का विधान बताया गया है। शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मुख्य व्रत है और उससे पूर्व एकादशी की रात्रि में जागरण सहित पूजन करने का निर्देश है। यह वैष्णव उत्सव होते हुए भी सर्वतोभद्र मण्डल में कामदेव (कन्दर्प/मदन) की रति सहित स्थापना, दिशाओं में मन्त्र-न्यास तथा काम-गायत्री का 108 बार जप करने की विधि कही गई है। इसके बाद केशव/जगन्नाथ और जनार्दन की लक्ष्मी सहित पूजा, रात्रि-जागरण, तथा दमन (दमना) की टहनियों और पुष्पों से अर्घ्य-नैवेद्य आदि अर्पित करने का विधान है। अंत में संगीत-नृत्य, जल-क्रीड़ा, गुरु को दक्षिणा, और सामूहिक भोज का वर्णन आता है। महादेव कहते हैं कि जगन्नाथ की पूजा में शिव-पूजा भी समाहित है; इस महोत्सव का केवल दर्शन भी बड़े पापों का नाश करता है। कुल-समृद्धि, महान पुण्य (हजार गौदान के तुल्य) और वसंतकालीन पुष्प-भक्ति से मुक्ति का फल प्रशंसित है।
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