
Rāma Protective Hymn (Rāma-Rakṣā Stotra/Kavaca)
उत्तरा-खण्ड के शिव–नारद संवाद में महादेव राम-रक्षा-स्तोत्र का उपदेश देते हैं और उसका विधान बताते हैं—ऋषि विश्वामित्र, देवता श्रीराम, छन्द अनुष्टुप् तथा विनियोग विष्णु-प्रसन्नता हेतु जप। इसके बाद कवच-शैली में श्रीराम तथा उनके दिव्य नामों का स्मरण कर हृदय, कण्ठ, नाभि, हाथ, पाँव, नेत्र, कान, जिह्वा आदि अंगों और इन्द्रियों की रक्षा का क्रम वर्णित है। अंत में पाठ के फल—दीर्घायु, सुख, बुद्धि, समृद्धि, अटल संरक्षण और मोक्ष—कहे गए हैं। ब्रह्मा से नारद और नारद से सत्पुरुषों तक अधिकृत परम्परा का उल्लेख कर यह भी कहा गया है कि सोते, घर में रहते या चलते-फिरते भी इसका पाठ पुण्यदायक है।
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