Adhyaya 68
Uttara KhandaAdhyaya 680

Adhyaya 68

Glorification and Characteristics of the Vaiṣṇavas

इस अध्याय में महेश्वर (शिव) नारद को वैष्णवों के लक्षण और महिमा बताते हैं। जो विष्णु-निष्ठ हो, भक्ति से युक्त होकर क्षमा, दया, तप, सत्य, शौच आदि सद्गुणों को धारण करे और हिंसामय धर्म का त्याग करे—वही वैष्णव कहा गया है। बाह्य चिह्नों में तुलसी-माला धारण करना, द्वादश तिलक लगाना तथा शंख, चक्र, गदा, पद्म आदि विष्णु-चिह्नों को धारण करना बताया गया है। ऐसे भक्तों का दर्शन ही पावन है; वे कुलों का उद्धार करने वाले हैं और कलियुग में पवित्रता में ‘विष्णु के समान’ माने गए हैं। शिव यह भी कहते हैं कि वैष्णवों का सम्मान, पूजन और उन्हें भोजन कराना अत्यन्त महान पुण्य देता है—यह समस्त देवताओं की पूजा के तुल्य है और ब्राह्मण-भोजन के फल को भी अनेक गुना बढ़ा देता है।

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