Adhyaya 46
Uttara KhandaAdhyaya 460

Adhyaya 46

Pāpamocanī Ekādaśī (The Ekādaśī that Removes Sin) — Caitra Kṛṣṇa Pakṣa

इस अध्याय में चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘पापमोचनी’ कहा गया है, जो समस्त पापों का नाश करती है और पिशाच-भाव तक से मुक्त करती है। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि यह कथा लोमश ऋषि ने राजा मांधाता को सुनाई थी। कथा में चैतारथ के निकट रहने वाले ब्रह्मचारी मुनि मेधाविन् कामदेव के प्रभाव से अप्सरा मंजुघोषा के मोह में पड़ जाते हैं; वर्षों बीतते हैं और उनका तप क्षीण हो जाता है। जब उन्हें पुण्य-हानि का बोध होता है, वे क्रोध में उसे पिशाची होने का शाप देते हैं, फिर दया करके पापमोचनी एकादशी-व्रत को उसके उद्धार का उपाय बताते हैं। मेधाविन् प्रायश्चित्त हेतु पिता च्यवन के पास जाते हैं; च्यवन भी उसी एकादशी-व्रत का विधान करते हैं। व्रत के प्रभाव से मेधाविन् शुद्ध होते हैं और मंजुघोषा दिव्य रूप पाकर स्वर्ग लौट जाती है। इस आख्यान के श्रवण-पठन को भी अत्यन्त पुण्यदायक कहा गया है।

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