Adhyaya 39
Uttara KhandaAdhyaya 390

Adhyaya 39

Mokṣadā (Mokṣā) Ekādaśī: Observance in Mārgaśīrṣa Bright Fortnight and the Liberation of Ancestors

इस अध्याय में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा (मोक्षा) एकादशी का विधान बताया गया है। भगवान दामोदर की तुलसी, धूप और दीप से पूजा, उपवास का संयम, तथा रात्रि-जागरण में भजन-कीर्तन और स्तुति करने का निर्देश है। इसके श्रवण-कीर्तन को भी महापाप-नाशक और बड़े वैदिक यज्ञों के तुल्य फलदायक कहा गया है। फिर एक पुराण-प्रसंग आता है—राजा वैखानस स्वप्न में अपने पितरों को नरक में कष्ट भोगते देखता है। चम्पक के ब्राह्मण उसे ऋषि पर्वत के पास ले जाते हैं; ऋषि बताते हैं कि किसी पूर्वजन्म के विशेष पाप से यह पतन हुआ। वे राजा को मोक्ष एकादशी का व्रत कर उसका पुण्य पिता को अर्पित करने की आज्ञा देते हैं। व्रत के पूर्ण होने पर दिव्य संकेत प्रकट होते हैं और पिता पितरों सहित मुक्त हो जाता है; इस प्रकार यह व्रत पितृ-मोक्ष और साधक के मोक्ष का साधन सिद्ध होता है।

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