Adhyaya 253
Uttara KhandaAdhyaya 2530

Adhyaya 253

Procedure for Worship of Viṣṇu and Exposition of Vaiṣṇava Conduct

अध्याय के आरम्भ में पार्वती हरि की महिमा तथा राम और कृष्ण की अद्भुत लीलाएँ और अधिक सुनने की इच्छा प्रकट करती हैं। तब महादेव उपदेश देते हुए विष्णु की उपासना का ठोस मार्ग बताते हैं और अर्चा-पूजा की विधि का वर्णन करते हैं। वे स्वयँ प्रकट (स्वयंव्यक्त) और प्रतिष्ठित (प्राण-प्रतिष्ठित) रूपों का भेद समझाकर बताते हैं कि मनुष्यों के पूजन हेतु भगवान विष्णु कहाँ-कहाँ और किस कारण से सन्निहित होते हैं, तथा प्रमुख तीर्थ-क्षेत्रों का उल्लेख करते हैं। इसके बाद वर्णानुसार भक्ति-आचरण, श्रुति–स्मृति के अनुरूप धर्माचरण की अनिवार्यता, और नित्य-पूजा का क्रम (शुद्धि, मंत्र, तिलक, अर्घ्य-उपहार, नैवेद्य, होम, अतिथि-सत्कार आदि) विस्तार से कहा गया है। यक्ष-भूतादि की पूजा और अशुद्ध भोजन का निषेध करते हुए अंत में यह सिद्धान्त स्थापित किया जाता है कि वैष्णवों का सम्मान करना, स्वयं विष्णु-पूजा से भी बढ़कर फलदायक है।

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