
Narration of the Battle with Bāṇāsura (Aniruddha–Uṣā Episode and Hari–Hara Encounter)
इस अध्याय में यादववंश का प्रसंग जोड़ते हुए कहा गया है कि श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के यहाँ मदनांश प्रद्युम्न का जन्म हुआ और उसके बाद अनिरुद्ध उत्पन्न हुए। उषा स्वप्न में एक दिव्य युवक को देखकर मोहित होती है; उसकी सखी चित्रलेखा चित्र बनाकर उस युवक की पहचान अनिरुद्ध के रूप में करती है और माया से उसे द्वारका से माहिष्मती ले आती है। भेद खुलने पर अनिरुद्ध बाणासुर के रक्षकों को परास्त करता है, पर नागपाश अस्त्र से बाँध दिया जाता है। तब श्रीकृष्ण सेना सहित आते हैं। वरदान के कारण बाण की रक्षा करने वाले शंकर (रुद्र) श्रीकृष्ण से युद्ध करते हैं। युद्ध में तापज्वर और शीतज्वर प्रकट होते हैं; हरि-हर संग्राम का श्रवण रोग-नाशक और पुण्यदायक कहा गया है। श्रीकृष्ण मोहनास्त्र से शंकर को स्तम्भित करते हैं; पार्वती विनय करती हैं और शंकर श्रीकृष्ण की सर्वोच्चता का स्तवन कर शरण ग्रहण करते हैं। श्रीकृष्ण बाणासुर की अनेक भुजाएँ काटकर भी उसे मारते नहीं, दया से जीवनदान देते हैं और मेल-मिलाप होता है। अनिरुद्ध मुक्त होते हैं, उषा-अनिरुद्ध का विवाह विधिपूर्वक सम्पन्न होता है और सब द्वारका लौट आते हैं।
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