
The Destruction of the Vidarbha Army
इस अध्याय में कृष्ण-चरित आगे बढ़ता है। मुचुकुन्द यवन का वध करके श्रीकृष्ण की कृपा से मोक्ष प्राप्त करता है। उधर क्रोधित जरासन्ध राम और कृष्ण पर चढ़ाई करता है, पर पराजित होकर अपने नगर लौट जाता है; फिर दोनों भ्राता मथुरा से द्वारका की ओर प्रस्थान करते हैं। विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य सभा-भवन और सिंहासन श्रीकृष्ण को अर्पित होते हैं, और उग्रसेन सहित अनेक राजा वहाँ एकत्र होते हैं। रैवत की कन्या रेवती का बलराम से विवाह वर्णित है। फिर कथा विदर्भ में आती है—भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी, जो लक्ष्मी का अंश और विष्णु की नित्य सहचरी कही गई है, शिशुपाल से विवाह के लिए बाध्य की जाती है; वह ब्राह्मण-दूत द्वारा कृष्ण को संदेश भेजती है। दुर्गा-पूजन के समय कृष्ण रुक्मिणी का हरण करते हैं; पीछा करने वाले राजाओं का बलराम संहार करते हैं, और रुक्मी का अपमान (मुण्डन) कर उसे छोड़ दिया जाता है।
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