Adhyaya 242
Uttara KhandaAdhyaya 2420

Adhyaya 242

Rāma Narrative Commencement and the Sanctity of Ayodhyā (Umā–Maheśvara Frame)

इस अध्याय में उमामाहेश्वर संवाद के भीतर स्वायम्भुव मनु का नैमिषारण्य में हरि का दीर्घ तप-पूजन वर्णित है। प्रसन्न होकर विष्णु वर देते हैं कि वे तीन जन्मों में मनु के पुत्र रूप से अवतरित होंगे, जिससे अवतार का उद्देश्य—धर्म की स्थापना—स्पष्ट होता है। आगे रावण को शिव से प्राप्त वर के कारण उसका उत्कर्ष, देवताओं की व्याकुलता और हरि का राम रूप में जन्म लेने का संकल्प कहा गया है। अयोध्या की महिमा मोक्षदायिनी धाम के रूप में की गई है, जहाँ विष्णु का निवास माना गया है। दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ से दिव्य पायस की प्राप्ति और राम सहित चारों भाइयों का जन्म, तथा जनक के खेत में सीता का प्राकट्य बताया गया है। ताड़का-वध, यज्ञ-रक्षा, अहल्या-उद्धार, शिवधनुष-भंग, परशुराम का दमन, वनवास, सीता-हरण, वानरों से मैत्री, लंका-युद्ध, रावण-वध, अग्नि-परीक्षा द्वारा सीता की शुद्धि और अयोध्या-प्रत्यावर्तन—इन प्रसंगों से भक्ति, शरणागति और धर्म-स्थापन का संदेश प्रतिपादित होता है।

Shlokas

No shlokas available for this adhyaya yet.