Adhyaya 221
Uttara KhandaAdhyaya 2210

Adhyaya 221

Description of Prayāga (within the Greatness of Indraprastha)

इस अध्याय में रानी हेमाङ्गी एक दिव्य चित्रित ग्रंथ दिखाती है, जिसमें अवतारों, लोकालोक, सात द्वीपों और सात समुद्रों का वर्णन है। भारतवर्ष की नदियाँ तथा इन्द्रप्रस्थ और प्रयाग के तीर्थ देखकर उसे पूर्वजन्म स्मरण होता है—वह मोहिनी नामक गणिका थी, जिसे डाकुओं ने मार डाला था; तब एक वैखानस तपस्वी ने उसे प्रयाग-जल पिलाया, जिसके पुण्य से उसे उत्तम पुनर्जन्म मिला और वह रानी बनी। हेमाङ्गी राजा वीरवर्मा से व्रत करती है कि प्रयाग जाकर स्नान-पूजन किए बिना वह भोजन नहीं करेगी। आकाशवाणी उसके कथन की पुष्टि करती है और कामना-पूर्ति हेतु तीर्थयात्रा तथा विधिपूर्वक स्नान का आदेश देती है। प्रयाग के शिव-तीर्थ में राजा दो तेजस्वी देवताओं की स्तुति करता है; तब हरि और ब्रह्मा प्रकट होकर हेमाङ्गी की प्रशंसा करते हैं कि उसने भोगासक्त पति को धर्ममार्ग पर लगाया। वे दोनों सत्यलोक और वैकुण्ठ की प्राप्ति का वर देते हैं तथा इस अध्याय के श्रवण-पाठ की फलश्रुति कहते हैं।

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