
Description of Madhuvana (Madhuvana Māhātmya Episode)
इस अध्याय में (उत्तरखण्ड, कालीन्दी-माहात्म्य) मधुवन की महिमा एक वंश-धर्म सम्बन्धी शंका के समाधान के साथ कही गई है—तारा-पुत्र बुध बृहस्पति के गृह से सम्बद्ध होकर भी चन्द्रवंश के प्रवर्तक कैसे हुए। सौभरि के निवेदन पर राजा शिबि के प्रश्न का उत्तर देते हुए नारद हरिद्वार की सभा (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) का वर्णन करते हैं, जहाँ बुध का सम्मान होता है; वहीं एक मुनिपुत्र उन्हें ‘व्यभिचारिणी का पुत्र’ कहकर अपमानित करता है। फिर कथा में चन्द्र द्वारा तारा का हरण, देव–असुर संघर्ष, ब्रह्मा द्वारा विवाद का शमन, बुध का जन्म और पितृत्व के विषय में बुध का आग्रह आता है; अंततः चन्द्र बुध को अपना पुत्र स्वीकार करते हैं। बुध अपमान करने वाले बालक को ‘कुण्ड’ (गड्ढा) होने का शाप देते हैं, पर बाद में शाप को शिथिल कर उसे नपुंसक बनाकर उपनयन के बाद लौटने का वर देते हैं। अंत में फलश्रुति है कि मधुवन-माहात्म्य का श्रवण/पाठ अश्वमेध-सदृश पुण्य देता है और विष्णुलोक की प्राप्ति कराता है।
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