
The Greatness of the Bhagavad-gītā (Supremacy of the Tenth Chapter: Vibhūti Yoga)
अध्याय 184 में गीता-माहात्म्य का विस्तार करते हुए कहा गया है कि भगवद्गीता वेदों का ‘प्राण’ है और उसका दशम अध्याय—विभूति-योग—सबसे श्रेष्ठ है। शिव–पार्वती के संवाद तथा उत्तरा-खण्ड की बहुस्तरीय कथा-परंपरा के माध्यम से काशी-क्षेत्र की मोक्ष-सीमा में स्थित गूढ़ ज्ञान की रक्षा का कारण बताया गया है। काशी में ‘धीरा-धीरा’ नामक सिद्ध ब्राह्मण वैराग्य और ज्ञान का आदर्श प्रस्तुत करता है; प्रथम-पुरुष कथन में भृङ्गिरिटि से जुड़े प्रसंग इस रहस्य को और स्पष्ट करते हैं। इसी क्रम में ब्रह्मा का हंस-रूप खग आता है, कमल अर्पित कर महादेव की स्तुति करता है और फिर अपने अपराध से उत्पन्न अंधकार-पतन की कथा सुनाता है। तब पञ्चपद्मा/पद्मिनी नामक कमल-कन्या कर्म-कारण का विधान समझाकर बताती है कि गीता के दशम अध्याय का श्रवण-पाठ पापों का नाश करता है, अत्यन्त पतितों को भी मुक्त करता है और जीवन्मुक्ति प्रदान करता है। अंत में यह फल सभी स्त्री-पुरुषों तथा सभी आश्रम-स्थितियों के लिए समान रूप से घोषित किया गया है।
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