
The Glory of Go-tirtha (Sacred Ford of the Cows)
इस अध्याय में काश्यप-सरोवर के निकट स्थित गो-तीर्थ की महिमा कही गई है। महादेव बताते हैं कि वहाँ स्नान करने से ब्रह्महत्या-सदृश महापातक सहित बड़े-बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। तीर्थ के नाम और प्रभाव का कारण भी बताया गया है—पूर्व पाप से काली हुई गायें वहाँ स्नान करके फिर श्वेत हो जाती हैं; यह गो-शुद्धि कर्म-शुद्धि का प्रत्यक्ष संकेत मानी गई है। इसके बाद गोमाताओं की नित्य सेवा-पूजा को धर्म बताया गया है; गोसेवा से मनुष्य अपनी माताओं के ऋण से मुक्त होता है। अंत में कहा है कि जो गो-तीर्थ में स्नान कर श्रेष्ठ ब्राह्मणों को दूध देने वाली गाय का दान करता है, वह ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है।
No shlokas available for this adhyaya yet.