Adhyaya 141
Uttara KhandaAdhyaya 1410

Adhyaya 141

The Greatness of Madhurāditya (Mathurā Tīrtha and the Mandavya–Dharma–Vidura Legend)

इस अध्याय में हिरण्यासंगम के निकट धर्मावती–गंगा के संगम-तीर्थ की महिमा कही गई है। वहाँ स्नान करने से स्वर्ग-प्राप्ति और वहीं श्राद्ध करने से पितृऋण से मुक्ति का फल बताया गया है। फिर मथुरा को पाप-नाशिनी तीर्थभूमि के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जहाँ मधुसूदन हरि के दर्शन दुर्लभ फल देते हैं। कंस-वध के बाद श्रीकृष्ण के गमन-प्रसंग का स्मरण कराते हुए मधुरादित्य और मधुरार्क की पूजा-स्थापना का वर्णन आता है। इसके बाद माण्डव्य–धर्म–विदुर की कारण-कथा है: माण्डव्य ऋषि को मिथ्या दोष से शूल पर चढ़ाया जाता है; वे साक्षात् धर्म से प्रश्न करते हैं। धर्म बताता है कि यह बाल्यकाल में किए गए एक क्रूर कर्म का प्रतिफल है; माण्डव्य के शाप से धर्म विदुर रूप में जन्म लेता है। विदुर साब्भ्रमती–धर्मावती संगम में स्नान कर शूद्रत्व-कलंक से मुक्त होता है—तीर्थयात्रा को कर्मदोष और सामाजिक पीड़ा की शुद्धि करने वाली बताया गया है।

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