
The Greatness of Nanditīrtha
उमा के नन्दिकुण्ड से निकलने वाली नदी के पावन प्रवाह और अर्बुद पर्वत के बाद स्थापित तीर्थों के विषय में पूछने पर महादेव बताते हैं कि कपालमोचन/कपालकुण्ड सर्वोत्तम तीर्थ है। वहीं उन्होंने ब्रह्मा के कपाल का भार उतारकर उसे त्याग दिया था, इसलिए वह स्थान अत्यन्त पवित्र और पापहर है। फिर पुलस्त्य–भीष्म संवाद की शैली में तीर्थ-माहात्म्य आता है—देव, सिद्ध, गन्धर्व और अप्सराएँ वहाँ आते हैं। वहाँ स्नान, कपालेश्वर का पूजन, एक रात का उपवास और ब्राह्मण-भोजन करने से महान यज्ञों का फल मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उदाहरण में सौदास (मित्रसह) शाप से राक्षस-भाव को प्राप्त होकर ब्रह्महत्या-दोष से पीड़ित था; साभ्रमती/नन्दितीर्थ से जुड़े इस तीर्थ में स्नान करके वह शुद्ध होता है, और वहाँ किया गया श्राद्ध पितरों का उद्धार करता है। फलश्रुति कहती है कि इस माहात्म्य का श्रवण पापों का नाश कर विष्णु-सायुज्य देता है, तथा महेश्वर की स्तुति प्रलय तक शोक से रक्षा करती है।
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