सा समीक्ष्य तथारूपामनाथामेकवाससम् | समाहूयाब्रवीद् भद्रे का त्वं कि च चिकीर्षसि,वह एक वस्त्र धारण किये थी एवं अनाथा-सी जान पड़ती थी। ऐसे दिव्य रूपवाली तरुणीको उस अवस्थामें देखकर रानीने उसे अपने पास बुलाया और पूछा--“भद्रे! तुम कौन हो और क्या करना चाहती हो?”
उसे ऐसे दिव्य रूप में, एक ही वस्त्र धारण किए और अनाथ-सी देखकर रानी ने बुलाकर कहा—“भद्रे! तुम कौन हो और क्या करना चाहती हो?”
वैशम्पायन उवाच