शृज्भारवेषाभरणौ रूपवन्तौ यशस्विनौ । महारथसहस््राणां समर्थों भरतर्षभौ,और ये शत्रुओंको संताप देनेवाले नकुल जो अबतक आपके यहाँ अश्वशालाके प्रबन्धक रहे हैं और ये सहदेव हैं, जो गौओंकी सँभाल करते आये हैं। ये दोनों (हमारी माता) माद्रीके पुत्र एवं महारथी वीर हैं। उत्तम शृंगार, सुन्दर वेष और आभूषणोंसे सुशोभित ये दोनों भाई बड़े ही रूपवान् और यशस्वी हैं। भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ ये नकुल-सहदेव युद्धमें सहस्रों महारथियोंका सामना करनेमें समर्थ हैं
śṛṅgāra-veṣābharaṇau rūpavantau yaśasvinau | mahāratha-sahasrāṇāṃ samarthau bharatarṣabhau | nakulaś ca śatrūṇāṃ santāpa-karaḥ pūrvam aśvaśālā-prabandhakaḥ | ayaṃ ca sahadevaḥ gopālana-saṃrakṣaṇe niyuktaḥ | etau mādryāḥ putrau mahārathī vīrau ||
अर्जुन बोले—ये दोनों माद्री के पुत्र, महारथी वीर हैं। यह शत्रुओं को संताप देनेवाला नकुल है, जो अब तक यहाँ आपकी अश्वशाला का प्रबन्धक रहा; और यह सहदेव है, जिसे गौओं की देखभाल सौंपी गई थी। उत्तम शृंगार, सुन्दर वेष और आभूषणों से सुशोभित, दोनों रूपवान् और यशस्वी हैं। हे भरतश्रेष्ठ! ये दोनों युद्ध में सहस्रों महारथियों का सामना करने में समर्थ हैं।
अर्जुन उवाच