अयं कुरूणामृषभो धर्मराजो युधिष्ठिर: । अस्य कीर्ति: स्थिता लोके सूर्यस्येवोद्यत: प्रभा,ये ही कुरुवंशमें सर्वश्रेष्ठ धर्मराज युधिष्ठिर हैं। उदयकालके सूर्यकी शान्त प्रभाके समान इनकी सुख-दायिनी कीर्ति समस्त संसारमें फैली हुई है
ayaṁ kurūṇām ṛṣabho dharmarājo yudhiṣṭhiraḥ | asya kīrtiḥ sthitā loke sūryasyevodyataḥ prabhā ||
अर्जुन बोले—ये कुरुवंश में श्रेष्ठ धर्मराज युधिष्ठिर हैं। उदयकाल के सूर्य की शांत प्रभा के समान इनकी कल्याणकारी कीर्ति संसार में प्रतिष्ठित है।
अर्जुन उवाच