इस प्रकार श्रीमह्या भारत विराटपवके अन्तर्गत वैवाहिकपरववमें पाण्डवप्राकट्यविषयक सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ७० ॥। बपाडानडज () | अऑपटआ छणडट एकसप्ततितमो<्ध्याय: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना विराट उवाच यद्येष राजा कौरव्य: कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर: । कतमोडस्यार्जुनो भ्राता भीमश्न॒ कतमो बली,वैशम्पायनजी कहते हैं-जनमेजय! तदनन्तर नियत समयतक अपनी प्रतिज्ञाका पालन करके अग्निके समान तेजस्वी पाँचों भाई महारथी पाण्डव तीसरे दिन स्नान करके श्वेत वस्त्र धारणकर समस्त राजोचित आभूषणोंसे विभूषित हो राजसभामें द्वारपर स्थित मदोन्मत्त गजराजोंकी भाँति सुशोभित होने लगे। वे राजा युधिष्ठिरको आगे करके विराटकी सभामें गये और राजाओंके लिये रखे हुए सिंहासनोंपर बैठे। उस समय वे भिन्न-भिन्न यज्ञवेदियोंपर प्रज्वलित अग्नियोंके समान प्रकाशित हो रहे थे
vaiśaṃpāyana uvāca | janamejaya! tadanantaraṃ niyata-samayaṃ yāvat sva-pratijñāyāḥ pālanaṃ kṛtvā agni-sadṛśa-tejasaḥ pañca bhrātaraḥ mahārathāḥ pāṇḍavāḥ tṛtīye divase snātvā śveta-vastrāṇi dhṛtvā samastaiḥ rājocitaiḥ ābharaṇaiḥ vibhūṣitāḥ rāja-sabhāyāṃ dvāra-deśe sthitāḥ mada-unmatta-gaja-rājā iva suśobhitā babhūvuḥ | te rājānaṃ yudhiṣṭhiraṃ puraskṛtya virāṭasya sabhāṃ jagmuḥ, rājñāṃ kṛteṣu siṃhāsaneṣu niṣeduḥ | tadā te bhinna-bhinna-yajña-vedīṣu prajvalitāgnaya iva prakāśamānāḥ babhūvuḥ |
वैशम्पायन बोले—हे जनमेजय! तत्पश्चात् नियत समय तक अपनी प्रतिज्ञा का पालन करके अग्नि के समान तेजस्वी पाँचों महारथी पाण्डव तीसरे दिन स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण किए और समस्त राजोचित आभूषणों से विभूषित हुए। वे राजसभा के द्वार पर मदोन्मत्त गजराजों की भाँति दीप्तिमान होकर खड़े हुए। फिर राजा युधिष्ठिर को आगे करके वे विराट की सभा में प्रविष्ट हुए और राजाओं के लिए रखे सिंहासनों पर बैठ गए। उस समय वे भिन्न-भिन्न यज्ञवेदियों पर प्रज्वलित अग्नियों के समान प्रकाशित हो रहे थे।
वैशम्पायन उवाच