उत्तर उवाच अकार्य ते कृतं राजन क्षिप्रमेव प्रसाद्यताम् । मा त्वां ब्रह्मविषं घोरं समूलमिह निर्दहेत्,उत्तर बोले--राजन्! आपने इन्हें मारकर बड़ा अनुचित कार्य किया है। शीघ्र ही इनको मनाइये; अन्यथा ब्राह्मणका भयंकर क्रोधविष आपको यहाँ जड़-मूलसहित भस्म कर डालेगा
उत्तर ने कहा—राजन्! आपने यह बड़ा अनुचित कार्य किया है। शीघ्र ही इन्हें प्रसन्न कीजिए; नहीं तो ब्राह्मण का भयंकर क्रोध-विष आपको यहाँ जड़-मूल सहित भस्म कर देगा।
उत्तर उवाच