जयत: कौरवीं सेनामेकस्य मम धन्विन: । शतं मार्गा भविष्यन्ति पावकस्येव कानने,'जैसे वनमें लगे हुए दावानलको आगे बढ़नेके लिये सैकड़ों मार्ग सुलभ होते हैं, उसी प्रकार कौरवसेनापर विजय पानेवाले मुझ एकमात्र धनुर्धर वीरके लिये इसमें सैकड़ों मार्ग प्रकट हो जायँगे
कौरव-सेना पर विजय पाने वाले मुझ एकमात्र धनुर्धर के लिए इसमें सैकड़ों मार्ग वैसे ही प्रकट होंगे, जैसे वन में दावानल के आगे बढ़ने के लिए सैकड़ों मार्ग खुल जाते हैं।
वैशम्पायन उवाच