Arjuna’s Concentrated Archery and the Rout of the Kaurava Mahārathas
Gāṇḍīva-Nirghoṣa Episode
तब अर्जुनने भारी उल्काकी भाँति अपनी ओर आती हुई उस सुवर्णभूषित शक्तिको दस बाण मारकर आकाशमें ही काट डाला। बुद्धिमान् पार्थके द्वारा दस टुकड़ोंमें कटी हुई वह शक्ति पृथ्वीपर गिर पड़ी ।। युगपच्चैव भल्लैस्तु ततः सज्यधनु: कृप: । तमाशु निशितै: पार्थ बिभेद दशभि: शरै:,तब कृपाचार्यने पुनः प्रत्यंचासहित धनुष लेकर उसके ऊपर एक ही साथ भलल नामक दस बाणोंका संधान किया और उन दसों तीक्ष्ण बाणोंद्वारा तुरंत ही अर्जुनको बींध डाला
tataḥ arjunena bhārī ulkā-iva svāṃ diśam āpatantīṃ suvarṇa-bhūṣitāṃ śaktiṃ daśabhiḥ śaraiḥ ākaśe eva chittvā daśadhā kṛtā sā śaktiḥ pṛthivyāṃ papāta | yugapac caiva bhallaiḥ tataḥ sajya-dhanuḥ kṛpaḥ tam āśu niśitaiḥ pārtha bibhēda daśabhiḥ śaraiḥ |
तब अर्जुन ने भारी उल्का की भाँति अपनी ओर आती हुई उस सुवर्णभूषित शक्ति को दस बाणों से आकाश में ही काट डाला। बुद्धिमान पार्थ द्वारा दस टुकड़ों में कटी हुई वह शक्ति पृथ्वी पर गिर पड़ी। तत्पश्चात सज्य धनुष धारण किए कृपाचार्य ने युगपत् ‘भल्ल’ नामक दस तीक्ष्ण बाण छोड़कर शीघ्र ही पार्थ को उन दसों शरों से बींध दिया।
वैशम्पायन उवाच