Arjuna’s Concentrated Archery and the Rout of the Kaurava Mahārathas
Gāṇḍīva-Nirghoṣa Episode
वैशम्पायन उवाच धनंजयवच: श्र॒ुत्वा वैराटिस्त्वरितस्तत: । हयान् रजतसंकाशान् हेमभाण्डानचोदयत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! धनंजयकी बात सुनकर विराटकुमार उत्तरने तुरंत ही चाँदीके समान चमकीले उन श्वेत घोड़ोंको; जो सोनेके साज-सामानसे सुशोभित हो रहे थे, हाँका
वैशम्पायन बोले—राजन्! धनंजय की बात सुनकर विराटकुमार उत्तर ने तुरंत ही उन चाँदी-से चमकते, स्वर्ण-साज से सुसज्जित घोड़ों को हाँका।
वैशम्पायन उवाच