आचार्य-क्षमा, देśa–kāla-नīti, तथा भेद-दोषः
Teacher-Reconciliation, Timing-Policy, and the Fault of Factionalism
अब हमारे शस्त्र चमक नहीं रहे हैं, घोड़े प्रसन्न नहीं जान पड़ते और अग्निहोत्रकी अग्नियाँ भी प्रज्वलित एवं उद्दीप्त नहीं हो रही हैं। यह सब अशुभकी सूचना है ।। प्रत्यादित्यं च न: सर्वे मृगा घोरप्रवादिन: । ध्वजेषु च निलीयन्ते वायसास्तन्न शोभनम्,हमारे सभी पशु सूर्यकी ओर दृष्टि करके भयंकर क्रन्दन करते हैं और रथोंकी ध्वजाओंमें कौए छिप रहे हैं। यह भी शुभसूचक नहीं है
pratyādityaṃ ca naḥ sarve mṛgā ghorapravādinaḥ | dhvajeṣu ca nilīyante vāyasās tan na śobhanam ||
हमारे सभी पशु सूर्य की ओर दृष्टि करके भयंकर क्रन्दन कर रहे हैं और रथों की ध्वजाओं में कौए छिप रहे हैं—यह भी शुभ नहीं है।
द्रोण उवाच