कृपकर्णसंवादः
Kṛpa’s Counsel to Karṇa on Deśa-Kāla and Coordinated Strategy
वैशम्पायन उवाच ततः स पार्थ वैराटिरभ्यवादयदन्तिकात् । अहं भूमिंजयो नाम नाम्नाहमपि चोत्तर:
vaiśampāyana uvāca tataḥ sa pārtha vairāṭir abhyavadayad antikāt | ahaṃ bhūmiṃjayo nāma nāmnāham api cottaraḥ ||
वैशम्पायन ने कहा— तब विराट का वह राजकुमार पार्थ के निकट जाकर उन्हें प्रणाम कर बोला— “मेरा नाम भूमिंजय है; और मुझे उत्तर भी कहते हैं।”
वैशम्पायन उवाच