Dhaumya’s Counsel on Incognito Conduct in a Royal Household (राजवसतौ आचरण-निति)
अग्नीन् प्रदक्षिणीकृत्य ब्राह्मणांश्न तपोधनान् । याज्ञसेनीं पुरस्कृत्य षडेवाथ प्रवव्रजु:,तत्पश्चात् पाण्डवोंने अग्नि तथा तपस्वी ब्राह्मणोंकी परिक्रमा करके द्रौपदीको आगे रखकर वहाँसे प्रस्थान किया। कुल छः व्यक्ति ही आसन छोड़कर एक साथ चले थे
agnīn pradakṣiṇīkṛtya brāhmaṇāṁś ca tapodhanān | yājñasenīṁ puraskṛtya ṣaḍ eva atha pravavrajuḥ ||
तत्पश्चात् पाण्डवों ने अग्नि तथा तपोधन ब्राह्मणों की प्रदक्षिणा की और याज्ञसेनी (द्रौपदी) को आगे रखकर प्रस्थान किया। केवल छह जन ही एक साथ उठकर चले।
वैशम्पायन उवाच