उत्तरो भयविषण्णः — बृहन्नडेन धैर्योपदेशः
Uttara’s Panic and Bṛhannadā’s Stabilizing Counsel
दुर्योधनं शान्तनवं कर्ण वैकर्तनं कृपम् । द्रोणं च सह पुत्रेण महेष्वासानू समागतान्,था, जब 2 जैसे वज्रधारी इन्द्र दानवोंको भयभीत कर देते हैं, उसी प्रकार मैं दुर्योधन, शान्तनुनन्दन भीष्म, सूर्यपुत्र कर्ण, कृपाचार्य तथा पुत्र (अश्वत्थामा) सहित द्रोणाचार्य आदि महान् धनुर्धरोंको, जो यहाँ आये हैं, युद्धमें अत्यन्त भय पहुँचाकर इसी मुहूर्तमें अपने पशुओंको वापस ला सकता हूँ
Uttara uvāca:
duryodhanaṁ śāntanavaṁ karṇa-vaikartanaṁ kṛpam |
droṇaṁ ca saha putreṇa maheṣvāsān samāgatān ||
मैं युद्ध में इन यहाँ एकत्र हुए महान धनुर्धरों—दुर्योधन, शान्तनुनन्दन भीष्म, वैकर्तन कर्ण, कृप तथा पुत्र सहित द्रोण—को अत्यन्त भयभीत कर सकता हूँ और इसी क्षण अपने गोधन को वापस ला सकता हूँ।
उत्तर उवाच