उत्तरो भयविषण्णः — बृहन्नडेन धैर्योपदेशः
Uttara’s Panic and Bṛhannadā’s Stabilizing Counsel
धनुष्यनवरश्नलासीत् तस्य शिष्यो महात्मन: । दृष्टपूर्वो मया वीर चरन्त्या पाण्डवान् प्रति,“वीर! यह उन्हीं महात्माका शिष्य है, अतः थर्नुर्विद्यामें भी उनसे कम नहीं है। पहले पाण्डवोंके यहाँ रहते समय मैंने इसे देखा है
dhanuṣyanavaraśnalāsīt tasya śiṣyo mahātmanaḥ | dṛṣṭapūrvo mayā vīra carantyā pāṇḍavān prati ||
वीर! यह उस महात्मा का शिष्य है; धनुष की डोरी और बन्धन आदि सँभालने में निपुण है। पाण्डवों के यहाँ विचरते समय मैंने इसे पहले देखा है।
वैशम्पायन उवाच