Virāṭa-parva Adhyāya 33 — Kuru Cattle-Raid and Matsya Mobilization (भूमिंजय-प्रेरणा)
युधिछिर उवाच मुज्च मुज्चाधमाचारं प्रमाणं यदि ते वयम् । दासभावं गतो होष विराटस्य महीपते: । अदासो गच्छ मुक्तोडसि मैवं कार्षी: कदाचन,तब युधिष्ठटिर बोले--भैया! यदि तुम मेरी बात मानते हो, तो इस पापाचारीको “छोड़ दो, छोड़ दो'। यह महाराज विराटका दास तो हो ही चुका है। (इसके बाद वे सुशर्मासे बोले --) तुम दास नहीं रहे, जाओ, छोड़ दिये गये। फिर कभी 'ऐसा काम न करना”
yudhiṣṭhira uvāca
muñca muñcādhamācāraṁ pramāṇaṁ yadi te vayam |
dāsabhāvaṁ gato hy eṣa virāṭasya mahīpateḥ |
adāso gaccha mukto 'si māivaṁ kārṣīḥ kadācana ||
युधिष्ठिर बोले— भाई! यदि तुम मुझे प्रमाण मानते हो तो इस अधमाचारी को छोड़ दो, छोड़ दो। यह महाराज विराट का दास-भाव प्राप्त कर चुका है। (फिर उससे बोले—) अब तुम दास नहीं रहे; जाओ, तुम मुक्त किए गए। फिर कभी ऐसा काम न करना।
युधिछिर उवाच