Virāṭa’s Mobilization to Recover the Cattle (गोधनरक्षणार्थ विराटस्य सैन्यसमायोजनम्)
यथोद्देश॑ च गच्छाम: सहितास्तत्र कौरवै: । सुशर्मा च यथोद्दिष्टं देशं यातु महारथ: । त्रिगर्ती: सहितो राजा समग्रबलवाहन:,ये यान्तु सहितास्तत्र विराटनगरं प्रति । क्षिप्रं गोपान् समासाद्य गृह्नन्तु विपुलं धनम् “तत्रिगर्त-सैनिक एक साथ मिलकर तुरंत विराट-नगरपर चढ़ाई करें और पहले ग्वालोंके पास पहुँचकर वहाँके बढ़े हुए गोधनपर अधिकार कर लें
yathoddeśaṁ ca gacchāmaḥ sahitās tatra kauravaiḥ | suśarmā ca yathoddiṣṭaṁ deśaṁ yātu mahārathaḥ | trigartīḥ sahito rājā samagrabalavāhanaḥ ye yāntu sahitās tatra virāṭanagaraṁ prati | kṣipraṁ gopān samāsādya gṛhṇantu vipulaṁ dhanam |
योजना के अनुसार हम कौरवों के साथ वहाँ चलें। और महारथी सुशर्मा भी अपने लिए निश्चित प्रदेश को जाए। त्रिगर्तों का राजा, अपनी समस्त सेना और वाहनों सहित, एक साथ विराट-नगर की ओर कूच करे; और शीघ्र ग्वालों तक पहुँचकर वहाँ का विपुल धन—अर्थात् बड़ा गोधन—हथिया ले।
वैशम्पायन उवाच