Virāṭa-parva Adhyāya 22 — Draupadī’s Abduction Attempt and Bhīma’s Suppression of the Kīcakas
अस्या: प्रदोषे शर्वर्या: कुरुष्वानेन संगतम् | दुःखं शोकं च निर्धूय याज्ञसेनि शुचिस्मिते,पवित्र मुसकानवाली द्रौपदी! तुम दुःख-शोक भुलाकर आगामी रात्रिके प्रदोषकालमें कीचकसे मिलो और उसे नृत्यशालामें आनेके लिये कह दो
asyāḥ pradoṣe śarvaryāḥ kuruṣvānena saṅgatam | duḥkhaṃ śokaṃ ca nirdhūya yājñaseni śucismite |
पवित्र मुसकानवाली याज्ञसेनि! दुःख और शोक को झटककर, आने वाली रात्रि के प्रदोषकाल में उससे भेंट का प्रबन्ध कर। जाकर कीचक से कह दे कि वह नृत्यशाला में आ जाए।
भीमसेन उवाच