Virāṭa-parva Adhyāya 22 — Draupadī’s Abduction Attempt and Bhīma’s Suppression of the Kīcakas
कीचक उवाच एवमेतत् करिष्यामि यथा सुश्रोणि भाषसे । एको भद्रे गमिष्यामि शून्यमावसथं तव,कीचक बोला--ठीक है। सुश्रोणि! तुम जैसा कहती हो, वैसा ही करूँगा। भद्रे! तुम्हारे सूने घरमें मैं अकेला ही जाऊँगा
kīcaka uvāca evam etat kariṣyāmi yathā suśroṇi bhāṣase | eko bhadre gamiṣyāmi śūnyam āvasathaṁ tava ||
कीचक बोला—ठीक है। सुश्रोणि! तुम जैसा कहती हो, वैसा ही करूँगा। भद्रे! तुम्हारे सूने घर में मैं अकेला ही जाऊँगा।
कीचक उवाच