द्रौपदी-भीमसेनसंवादः
Draupadī–Bhīmasena Dialogue on Suffering, Kāla, and Daiva
नूनमार्या न जानाति कृच्छू प्राप्त धनंजयम् । अजातशत्रुं कौरव्यं मग्नं दुर्यृतदेविनम्
निश्चय ही मेरी सास कुन्ती नहीं जानती होंगी कि धनंजय ऐसे संकट में पड़ गया है; और कौरवकुल-शिरोमणि अजातशत्रु युधिष्ठिर भी द्यूत के मोह में डूबकर शोक-सागर में निमग्न हैं।
वैशम्पायन उवाच