द्रौपद्याः भीमसेन-प्रबोधनम्
Draupadī Awakens Bhīmasena
विराट उवाच परोक्ष नाभिजानामि विग्रहं युवयोरहम् । अर्थतत्त्वमविज्ञाय कि नु स्थात् कौशलं मम
विराट बोले—सैरन्ध्री! तुम दोनों में मेरे परोक्ष में किस प्रकार झगड़ा हुआ, यह मैं नहीं जानता। वास्तविक बात जाने बिना न्याय करने में मेरा कौशल क्या प्रकट होगा?
विराट उवाच